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योगेन्द्र यादव द्वारा सुंदरता से षड्यंत्र उजागर किया गया 👌 पाखंडियों का अतिवाद हेतु उपयुक्त विडियो। उत्तर भारत के हिन्दी भाषी ओबीसी वर्ग के लोगों को गंभीरता पूर्वक सुनना होगा कि उनकी भागीदारी के बिना ही वर्षों से पाखंड एवं आडम्बर के षड्यंत्र रच अयोग्य लोग उनपर शासन कर रहे हैं।
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चित्रा ने योगेंद्र जी को “योगेंद्र यादव” कहा तो योंगेंद्र जी ने चित्रा को “चित्रा त्रिपाठी” बोल दिया। सिंपल। इसमें अपमान की कौन सी बात है? लेकिन ये सच है कि सात दशक के लोकतंत्र में भारत बदल गया है। जो सरनेम कभी देव और वेद प्रदत्त सम्मान के सूचक थे, भूदेव माने जाते थे वह सरनेम बोलने पर पब्लिक नाराज़ हो जाती है योगेन्द्र यादव द्वारा सुंदरता से षड्यंत्र उजागर किया गया पाखंडियों का अतिवाद हेतु उपयुक्त विडियो। उत्तर भारत के हिन्दी भाषी ओबीसी वर्ग के लोगों को गंभीरता पूर्वक सुनना होगा कि उनकी भागीदारी के बिना ही वर्षों से पाखंड एवं आडम्बर के षड्यंत्र रच अयोग्य लोग उनपर शासन कर रहे हैं।
गोल्ड मेडलिस्ट एमबीबीएस,
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साधारण कपड़े पहने, नंगे पैर दीवार पर बैठा एक व्यक्ति 3 रुपये का बोलपेन हाथ में लिए कागज के टुकड़े पर कुछ लिखता है। यह व्यक्ति हैं डॉक्टर शंकर गौडा गोल्ड मेडलिस्ट एमबीबीएस, कर्नाटक के मंडुआ से,*म और कोलकाता मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमडी। उनका अपना क्लीनिक नहीं है। एक केबिन बनाने में लाखों रुपए लगते हैं। कहां से लाएंगे इतना पैसा ..?? वह शहर से दूर दो कमरों के मकान में रहता है। मरीज इलाज के लिए इतनी दूर कैसे आ सकते हैं, इसलिए वह रोजाना साइकिल से सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक शहर के एक फास्ट फूड रेस्टोरेंट के बाहर बैठकर सैकड़ों गरीब मरीजों की जांच करते हैं. उनका अच्छी तरह से निदान करता है और सस्ती, जेनेरिक दवाएं लिखता है। क्या आपको पता है कि वह कितना चार्ज करता है? इसमें केवल 5 रुपये लगते हैं। जी हां, सिर्फ 5 रु. गोल्डमेडलिस्ट एमडी डिग्री वाले डॉक्टर गरीब मरीजों से सिर्फ 5 रुपए चार्ज करते हैं। आज की दुनिया में जहां डॉक्टर सचमुच गरीब, आम लोगों को लूट रहे हैं। किन्तु डॉ. शंकर गौडार बहुतों के लिए एक ईश्वरीय पुरुष है। ऐसे समाजसेवी मनुष्य को वंदन प्रणाम🙏🏻
मान्यवर कांशीराम शाहब का जीवन परिचय
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कांशीराम। 🎁🎂🎂🙏 राजनेता जन्म: 15 मार्च 1934, रोरापुर, पंजाब मृत्यु: 9 अक्तूबर 20 व्यवसाय: राजनीतिक,सामाजिक, आर्थिक, कांशी राम एक भारतीय राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने अछूतों और दलितों के राजनीतिक एकीकरण तथा उत्थान के लिए जीवन पर्यान्त कार्य किया। उन्होंने समाज के दबे-कुचले वर्ग के लिए एक ऐसी जमीन तैयार की जहा पर वे अपनी बात कह सकें और अपने हक़ के लिए लड़ सके। इस कार्य को करने के लिए उन्होंने कई रास्ते अपनाए पर बहुजन समाज पार्टी की स्थापना इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कदम था। कांशी राम ने अपना पूरा जीवन पिछड़े वर्ग के लोगों की उन्नति के लिए और उन्हें एक मजबूत और संगठित आवाज़ देने के लिए समर्पित कर दिया। वे आजीवन अविवाहित रहे और अपना समग्र जीवन पिछड़े लोगों लड़ाई और उन्हें मजबूत बनाने में समर्पित कर दिया कांशीराम प्रारंभिक जी कांशी राम का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रोरापुर में एक रैदासी सिख परिवार में हुआ था। यह एक ऐसा समाज है जिन्होंने अपना धर्म छोड़ कर सिख धर्म अपनाया था। कांशी राम के पिता अल्प शिक्षित थे लेकिन उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा ...
World Bicycle Day 2022: आज दुनियाभर में मनाया जा रहा है ‘विश्व साइकिल दिवस’, जानें इतिहास और महत्व
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2022 World Bicycle Day Date History Significance : हर साल 3 जून को दुनियाभर में साइकिल चलाने और इसके फायदों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व साइकिल दिवस जोर शोर से मनाते हैं. इसके फायदों की बात करें तो साइकिल परिवहन का एक सरल साधन तो है ही, साथ ही यह पर्यावरण के संरक्षण में भी काफी योगदान दे सकती है. अगर इससे जुड़ी शारीरिक और मानसिक सेहत से की जानकारी दें तो शोधों में पाया गया है कि रोजाना आधा घंटा साइकिलिंग करना हमें मोटापे, हृदय रोग, मानसिक बीमारी, मधुमेह और गठिया आदि कई बीमारियों से बचा सकता है. विश्व साइकिल दिवस का इतिहास संयुक्त राष्ट्र (United Nations) महासभा ने 3 जून 2018 के दिन को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी और तब से हर साल इसे दुनियाभर में आज के दिन सेलिब्रेट किया जा रहा है. इस दिन को मनाने का प्रस्ताव अमेरिका के मोंटगोमरी कॉलेज के प्रोफेसर लेस्जेक सिबिल्सकी ने याचिका के तौर पर दी थी. दरअसल, 1990 तक साइकिल का दौर काफी अच्छा था लेकिन धीरे-धीरे इसका महत्व घटता चला गया. दोबारा इसके महत्व को बताने के लिए विश्व साइकिल दिवस...
क्या आचार्य प्रशांत भी पाखंडी है ? आंखिर क्यों एक IIT- IIM प्रशांत त्रिप...
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